सोमवार, 31 दिसंबर 2018

वास्तु क्या है ?

vastu एक प्राचीन विज्ञान हे जो बताता हे की काम करने और रहने वाली जगह का architecture किस प्रकार का होना चाहिए। वास्तु के नियम के अनुसार बनायीं गई ईमारत मदद करती है प्रकृति के सारे लाभ उठाने मे। vastu वो विज्ञान हे जिसकी वजह से सारी दिशाओं और मानव जाती के बीच संतुलन बना रहता है।

 

वास्तु शास्त्र क्या है ? 


वास्तु शास्त्र वो है जो विज्ञानं , कला , खगोल, और ज्योतिष को जोड़ता है। यह एक विज्ञान है डिजाइनिंग का और ईमारत बनाने का।वास्तु शास्त्र की मदद से हम हमारी जिंदगी एक बेहतर जिंदगी बना सकती है। हमे हमेशा वास्तु  शास्त्र के नियम के अनुसार ही बिल्डिंग बनानी चाहिए। वास्तु शास्त्र के नियमो का पालन करने से जीवन सुखमय रहता है।  वास्तु मे प्रकृति के ५ तत्त्व बहुत जरूरी होते हे। यह ५ तत्त्व है हवा , जल , धरती , आग और अंतरिक्ष। कोई भी सरंचना जो इन तत्वों के या ४ दिष्याओं के अनुसार नई होती वो कभी ना कभी मुसीबतें झेलती है।जो इमारतें वास्तु  शास्त्र के नियमो के अनुसार बनायीं  गयी है वो  ईमारत वहां  रहने वाले लोगों के लिए कभी ना कभी सौभाग्यशाली साबित होती है। वास्तु शास्त्र क विचार के पीछे architecture design और प्रकृति और उसके आध्यात्मिक विश्वासों का एकीकरण करना है। वास्तु शास्त्र का सिद्धांत इमारतों की सरंचना मे प्राचीन वक़्त से इस्तेमाल किया जा रहा है और आज भी किया जाता है। vastu shastra for home, मंदिर और भवन के निर्माण के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला प्राचीन विज्ञानं है। कभी कभी वास्तु शास्त्र को आधुनिक समय के विज्ञान architecture का स्वरुप माना जाता है। 

वास्तु के तत्त्व 

vastu एक विज्ञान है जो प्रकृति और ब्रह्माण्ड के ५ तत्त्वों को जोड़ता है ताकि उनका और आदमी के बीच संतुलन बने रहे। डिज़ाइन का कार्य इन ५ तत्वों के साथ बिलकुल समझने के लिए जरूरी है इन ५ तत्वों को एक एक करके समझना: 

१. धरती  

 



यह सबसे पहला तत्त्व है प्रकृति का जो सबसे जयदा ऊर्जा उत्त्पन करता है। भूमि खरीदने से पहले जरूरी है उसका परामर्श करना क्यूंकि भूमि की मिटटी , क्षेत्र जरूरी होता है वास्तु मे। यह तत्त्व सबसे जरूरी है वास्तु मे। 

२. जल 



धरती पे जल अनेक रूपों मे उपलभ्द है। जेसे की बारिश, समुद्र और नदियां। यह दूसरा जरूरी तत्त्व है वास्तु मे। वास्तु जल स्रोतों का सही प्लेसमेंट बताता है। जल ईशान कोण का तत्त्व है इसीलिए घर का जल ईशान कोण की ओर से ही बहार निकलना। ईशान कोण दिशा उपयुक्त है जल के लिए। 

 ३. अग्नि 


 
अग्नि दक्षिण पूर्व दिशा का तत्त्व है। वास्तु के अनुसार घर मे रसोई में आग और बिजली के उपकरणों हमेशा दक्षिण पूर्व दिशा मे रखना चाहिए। सारे ऊर्जा के स्रोतों का आधार अग्नि है। वास्तु के अनुसार घर मे सूरज की रौशनी के लिए हवादार सही होना चाहिए। 

४. वायु 

 


वायु सबसे जरूरी है सारे जीवित लोगों के लिए धरती पर। वास्तु मे वायु एक और जरूरी तत्त्व है। वायु भी ईशान कोण दिशा का तत्त्व है। वायु अनेक गैसों का समूह है। जैसे की ऑक्सीजन , नाइट्रोजन , हीलियम और कार्बन डाइऑक्साइड। इन सभी गैसों का संतुलित प्रतिशत जरूरी है मानव जाती के लिए। vastu के अनुसार घर मे खिड़कियों और दरवाज़ों की दिशाएं बहुत जरूरी है।

 ५. ब्रह्माण्ड 

 


vastu अनेक प्रकार की दिशाएं बताता है बेहतर स्पेस के लिए। वास्तु के अनुसार घर के केंद्र मे खुली जगह होनी चाहिए। 

वास्तु शास्त्र एवं दिशाएं 




वास्तु मे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम मूल दिशाएं है। 
 १. वास्तु शास्त्र मे दिशा - पूर्व दिशा 
 वास्तु शास्त्र मे यह दिशा बहुत जरूरी है। यह सूर्य उदय की दिशा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन बनाते वक़्त यह दिशा सबसे ज्यादा खुली रेहनी चाहिए। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से वहां रहने वाले लोग बीमार रहते है।परेशान और चिंतित रहना भी इस दिशा मे वास्तु दोष होने के लक्षण है। 
 २. वास्तु शास्त्र मे दिशा - आग्नेय दिशा 
आग्नेय दिशा पूर्व और दक्षिण दिशा की मध्य दिशा होती है। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से घर मै अशांति और तनाव रहता है। जब यह दिशा शुभ होती है तब घर मे रहने वाले स्वस्थ रहते है। अग्नि तत्वे के सारे कार्यों के लिए यह दिशा शुभ होती है। 
३. वास्तु शास्त्र मे दिशा - दक्षिण दिशा 
वास्तु शास्त्र मे यह दिशा सुख और समृद्धि का प्रतिक होती है। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से मान सामान और रोज़गार मे परेशानिया होती है। 
४. वास्तु शास्त्र मे दिशा - नैऋत्य दिशा 
नैऋत्य दिशा दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य दिशा होती है। दुर्घटना , रोग और मानसिक अशांति इस दिशा मे वास्तु दोष क लक्षण है। इस दिशा मे वास्तु दोष आपके आचरण और व्यव्हार को भी प्रभावित करती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर बनाते वक़्त इस दिशा को बाहरी रखना चाहिए। 
५. वास्तु शास्त्र मे दिशा -इशान दिशा 
वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय इस दिशा मे नहीं होना चाहिए। 

वास्तु दोष क्या है ?

 



वास्तु एक पूल है मानव और प्रकृति के बीच। हम जितने आधुनिक हो रहे है उतना ही दूर हो रहे हमारे वेदों से। वास्तु एक विज्ञानं है सभी चीज़ो को सही जगह पर रखना और प्रकृति के तत्वों क साथ संतुलन बनाये रखने का। अगर कोई घर या काम करने की जगह कोई भी वास्तु का सिद्धांत का उल्लंघन करता है तो फिर उससे vastu dosh कहा जाता है। वास्तु दोष के कारन उस भवन में रह रहे व्यक्तियों को पारिवारिक , सार्थिक और सामाजिक मुसीबतों का सामना करना पढ़ता है। हर वास्तु दोष के उपाय होते है ताकि वो vastu dosh हटाया जा सके। वास्तु दोष के निवारण के कई तरीके है , जैसे की कमरे के सामान की जगह बदलना, घर का आतंरिक डिज़ाइन बदलना। अगर vastu dosh निवारण बताये गए माने जाते है तोह घर की सुख शान्ति और ख़ुशी लौट आती है। 

 वास्तु के क्या कारण है ? 

vastu dosh के कारन बहुत सारे है। कुछ वास्तु दोष के कारन हो सकते है जैसे की घर मे रह रहे लोगो की वजह से भी वास्तु खराब होता है। अगर घर मे रहने वाले लोग अनैतिक आचरण करते हो तोह उस वजह से भी घर का वास्तु ख़राब होता है। कई बार ऐसा भी होता है की घर का वास्तु सही है पर फिर भी घर मे सब सही नहीं लगता। इसका एक ही कारन है जो की है नकारात्मक ऊर्जा जो घर मे होती है।

 कैसे पहचाने की घर मे वास्तु दोष है ?


 

vastu dosh की लक्षण बहुत सारे है :
 १. यदि आप सर्दी झुकाम से ज्यादा पीड़ित रहते है तो इसका मतलब है की मकान मे ब्रह्मस्थल पे दोष है। 
२. यदि घर के अग्नि कोण और ईशान कोण में वास्तु दोष है तो फिर घर के लोगो लो दिएबेटीएस होने की संभावनाए ज्यादा है। 
३. vastu tips for house के according अगर घर के लोग हीन भावना रखते है तो इसका मतलब है की माकन के उत्तर पश्चिम या दक्षिण पश्चिम प्रकार मे वास्तु दोष है। 
४. vastu tips for home के according यदि आपका माकन गल्ली का आखरी माकन है तो घर के सदस्य ज्यादातर कष्ट मे रहते है। 
५. अगर घर पर किसी भी वृक्ष या मंदिर की छाया पढ़ रही है तोह घर के सदस्य ज्यादातर किसी न किसी रोग क शिखर रहते है। 
६. अगर नैऋृत्य कोण मे कोई कुवां है तो फिर उस घर के सदस्यों की आयु क्षय होती है। 

वास्तु दोष के सरल उपाय (vastu tips)


 
कुछ वास्तु दोष निवारण हेतु उपाय यहाँ दिए गए हुए है। यह सभी उपाय वास्तु दोष से कैसे बचें के सवाल का जवाब देते है। 
१. वास्तु के अनुसार सीढियाँ की उचाई तरीके की उचाईयों तक पहुँचने मे मदद कर सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में बनाई गई सीढ़ियां बहुत महत्वपूर्ण होती है। वास्तु के अनुसार सीढियाँ घर के उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए अथवा पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। 
२. वास्तुशास्त्र के नियम के अनुसार घर मे पूजा घर ईशान कोण मे होना चाहिए। 
३.पूजा घर मे ईशान कोण मे जल का कलश होना चाहिए। 
४. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कभी भी झाड़ू खड़ी नहीं रखनी चाहिए। 
५. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर मे अपने आप खुलने वाले दरवाज़े नहीं होने चाहिए। 
६. घर की खिड़कियां खुली रेहनी चाहिए ताकि रौशनी हमेशा अंदर आती रहे। 
 ७. वास्तु दोष से बचने का उपाय यह भी हो सकता है की जरूरी कागजात हमेशा अलमारी मे रखने चाहिए। 
८. vastu tips for kitchen के according kitchen मे भोजन बनाते समय पहली रोटी या तो गाय को या अग्निदेव को अर्पित करें।

0 comments: