सोमवार, 31 दिसंबर 2018

कैसी हो वास्तु के अनुसार रसोई - kitchen vastu tips in hindi

Vastu for kitchen in hindi

आप सभी जानते होंगे कि महिलाओ का ज्यादा से ज्यादा वक्त घर के एक हिस्से में सबसे ज्यादा बीतता है, और वो जगह है किचन यानि रसोईघर। इसलिए घर का ये काफी अहम् हिस्सा होता है। रसोई के लिए भी किचन वास्तु होता है, जिस पर ध्यान देना बेहद जरुरी होता है। रसोई घर के हर हिस्से के बारे में वास्तु जरुरी होता है, जैसे चूल्हा (chulha) रखने का स्थान, खिड़की, दरवाजा आदि की दिशा और इन छोटी छोटी कई बातो पर ध्यान देना किचन वास्तु के लिए जरुरी होता है।
चलिए जानते हैं उन ख़ास और जरुरी किचन वास्तु बातो के बारे में -


वास्तु के अनुसार रसोई का रंग


  • वास्तु के अनुसार किचन की दीवारों पर कभी भी आसमानी रंग या नीला रंग का इस्तेमाल न करे।

वास्तु के हिसाब से रसोई की दिशा


  • वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन हमेशा 'आग्नेय कोण'में होना चाहिए,'आग्नेय कोण'अर्थात दक्षिण पूर्व दिशा। अगर इस दिशा में रसोईघर नही बन सकता है तो आप उत्तर पश्चिम दिशा में बनवा सकते है, ये वैकल्पिक स्थान होता है।
  • कुछ ऐसी दिशाएं होती है जिस दिशा में रसोईघर बिलकुल नही होनी चाहिए जैसे उत्तर, दक्षिण पश्चिम और उत्तर पूर्व दिशा। अगर आपकी रसोईघर दक्षिण दिशा में बनी हुई है तो आप अपना चूल्हा (chulha) पूर्व दिशा में रखे।

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Vastu shastra tips in hindi for kitchen



  • वास्तु के अनुसार खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्म कभी भी उत्तर या पश्चिम दिशा की दीवारों से जुड़ा हुआ नही होना चाहिए।
  • किचन की दीवारों पर कभी भी काला ग्रेनाईट इस्तेमाल न करे, इसके लिए सफेद पत्थर या हरा ग्रेनाईट या महरून ग्रेनाईट इस्तेमाल में लाये।

Kitchen Vastu In Hindi



  • Vastu के अनुसार जब भी खाना बनाए अपना मुंह पूर्व दिशा की और रखे।
  • अगर किचन में फ्रिज हैं तो इसे उत्तर पश्चिम दिशा में रखे।
  • किचन की खिड़की के नीचे चूल्हा नही हो, इस बात का ख़ास ख्याल रखे।
  • जिस जगह पर चूल्हा रखा है उसके ऊपर कभी भी शेल्फ न बनाएं।

Vastu ke Anusar Kitchen


  • अपने अनाज को हमेशा रसोई की दक्षिण पश्चिम दिशा में रखे।
  • कभी भी रसोई के बीचोबीच चूल्हा अर्थात गैस न रखे।
  • किचन का दरवाजा उत्तर दिशा या उत्तर पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • यदि किचन की कम से कम एक खिड़की पूर्व दिशा में तो वास्तु के हिसाब से इसे काफी उत्तम माना जाता है।

Vastu shastra for kitchen in hindi



  • वास्तु के अनुसार रसोई में डाइनिंग टेबल नही रखना चाहिए पर अगर रखना जरुरी है तो इसे पश्चिम दिशा या उत्तर पश्चिम दिशा में ही रखे।
  • चूल्हा और सिलेंडर किचन की दक्षिण पूर्व दिशा में रखे।
  • अगर आपके पास माइक्रोवेव है तो इसे दक्षिण पूर्व दिशा में रखे।

Vastu shastra for kitchen sink


  • इस बात का ख़ास ध्यान रखे की आपके किचन का नल सही काम कर रहा हो, अगर नल लीक कर रहा हो तो उसकी तुरंत मरमत करवाएं।
  • किचन में पीने का पानी उत्तर दिशा की और रखे।
  • बर्तन धोने वाला वाश बेसिन सिंक उत्तर पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
  • चूल्हा और बर्तन धोने का सिंक एक ही प्लेटफॉर्म में नही होना चाहिए।

वास्तु कंपास


वास्तु कंपास हमेशा 8 चार्ट्स के साथ आता है। यह होते है घर के लिए ,लिविंग रूम के लिए , शयन कक्ष के लिए, रसोई के लिए, दुकान के लिए, काम करने की जगह के लिए ,फैक्ट्री और डिस्पेंसरी के लिए। वास्तु शास्त्र के मदद से हम वास्तु कंपास को तरीके से इस्तेमाल कर सकते है। कम्पास से घर की दिशा कैसे देखे ।

How to check direction of house with Compass



  • सबसे पहले तो रसोई के लिए दिया हुआ चार्ट लीजिये क्यूंकि वास्तु कंपास का हर चार्ट अलग पहलू बताता है।
  • चार्ट को यन्त्र के बीच मे रखे ताकि बीच वाली पिन चार्ट के बीच मे से बाहर निकले।
  • वास्तु कंपास मे जो दिशा बताने वाली सुई आती है उसको चार्ट के ऊपर रखे।
  • दिशा बताने वाली सुई को घूमने दे बिना रुकावट। कुछ समय बाद सुई घूमना बंद करदेगी।
  • सही दिशा पहचाने के लिए सुई पे जो मार्क्स होते है उनको ध्यान से पढ़िए।
  • अपनी रसोई के दिशा फिर आपसे सुई की बताई हुई दिशा से जांच करे और जहाँ जरूरत हो वह बदलाव करे।
  • वास्तु कम्पास आप ऑनलाइन भी खरीद सकते है इसका मूल्य आप नीचे देखें



अपने घर के इस अहम् हिस्से को बनवाने के समय ऊपर दिए सभी kitchen vastu tips पर जरुर ध्यान दे ताकि आपके घर में खुशहाली आए और वास्तु दोष की वजह से किसी प्रकार की दिक्कत न आये।

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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दीवारो का रंग , घर का रंग कैसा हो (wall colours according to vastu shastra )

Colour of wall according to vastu

अगर मैं कहू कि घर की दीवारों का रंग उस घर में रहने वाले लोगो पर असर डालता है तो क्या आप विश्वास करेंगे? शायद नही पर जब आप इस आर्टिकल को पूरा पढेंगे आपको पता चलेगा कि घर का रंग वास्तु के हिसाब से न हो तो उसका गलत असर पड़ता है। चलिए बिना समय गवाए शुरू करते है।

Wall Color According To Vastu

वास्तु के अनुसार घर का रंग कैसा हो - 



मनोवैज्ञानिको का भी मनाना है कि रंगों का असर लोगो पर पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि हर रंग का एक Emotion होता है जो कई बार उस घर में रहने वाले लोगो के इमोशन से मेल नही खाता है। इसलिए आपकी मदद के लिए घर पर लगने वाले रंगों से सम्बंधित वास्तु के कुछ टिप्स शेयर कर रहे है- 

दिशा के आधार पर घर की दीवारों के रंग

  • उत्तर पूर्व दिशा में – हल्का नीला 
  • पूर्व दिशा में – हल्का नीला या सफेद रंग 
  • दक्षिण पूर्व दिशा – ऐसा माना है कि दक्षिण पूर्व दिशा अग्नि से सम्बंधित होती है इसलिए इस दिशा के लिए सिल्वर, गुलावी, ऑरेंज रंग सही होता है, क्योकि इन रंगों से घर में ऊर्जा बदती है। 
  • उत्तर दिशा में – पिस्ता हरा और हरा रंग 
  • उत्तर पश्चिम-दिशा में- ऐसा माना जाता है ये दिशा हवा से सम्बंधित होती है। इसी कारण ये दिशा के लिए हल्का स्लेटी, सफेद और क्रीम रंग उपयुक्त होता है।
  • पश्चिम दिशा में – ऐसा माना जाता है कि ये जगह जल से सम्बंधित होती है इसलिए इस दिशा के लिए सफेद और नीला रंग सबसे सही होता है। 
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में – इस दिशा के लिए मिट्टी के जैसे रंग या हल्का ब्राउन रंग उपयुक होता है। 
  • दक्षिण दिशा के लिए पीला और लाल रंग उपयुक्त होता है। 
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार अपने घर पर कुछ ख़ास रंग जैसे काला, गुलाबी और लाला रंग लगाने से पहले ये पता कर लेना चाहिए कि क्या ये रंग आपके लिए उपयुक्त है, क्योकि ये रंग हर किसी के लिए सही नही होते। 

Color Of Bedroom According to Vastu



  • वास्तु के अनुसार बेडरूम का रंग नीला ,और दिशा होनी चाहिए दक्षिण पश्चिम । 
wall colours for bedroom according to vastu
bedroom color according to vastu

Kitchen Wall Colors According To Vastu

  • वास्तु के अनुसार रसोई का रंग के लिए लाल या ऑरेंज , और दिशा होनी चाहिए दक्षिण-पूर्व । 
  • घर के लिविंग रूम या गेस्ट रूम के लिए दिशा उत्तर-पश्चिम होनी चाहिये और रंग सफेद होना चाहिए। 
  • बच्चो का कमरे के लिए दिशा होनी चाहिए उत्तर पश्चिम और रंग सफेद। 
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय के लिए दिशा होनी चाहिये उत्तर-पश्चिम और रंग सफेद होना चाहिए। 
  • घर के हॉल के लिए दिशा उत्तर पूर्व या उत्तर पश्चिम होनी चाहिए और रंग सफेद या पीला होना चाहिए।
  • घर का बाहरी रंग उस घर के मालिक के हिसाब से होना चाहिये।

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चलिए जानते हैं कौन सा रंग किस तरह के इंसान से मेल खाता है :


  • हल्का भूरा रंग पृथ्वी से सम्बंधित है यानि ये रंग शांति और पोषण का प्रतिक है। ऐसा माना जाता है कि हरा रंग सुख समृद्धि का प्रतिक होता है । ऐसा भी माना जाता है कि ये रंग दीवारों को जीवंत कर देते है।ये रंग आँखों को भी आराम देता है। बैंगनी को शिष्टता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए घर पर बैंगनी या इससे मिलता जुलता रंग लगाना अच्छा माना जाता है। इस रंग से बने पेंटिंग से आपकी शान और शौकत का भाव प्रकट होता है। इसलिए जिन लोगो को शाही अंदाज में रहना पसंद है तो उनको ये रंग जरुर लगवाना चाहिए क्योकि ये रंग उनको काफी सूट करेगा।
  • नीला रंग ठंडा और सुकून देने वाला माना जाता है। कमरे में ये रंग होने से मूड हल्का रहा है और इंसान का मन प्रसन्न रहता है। आजकल के मॉडर्न घरो के लिए ये रंग उपयुक्त है।
  • लाल रंग प्यार का प्रतिक है। इस रंग में जुनून, अग्नि और गर्मी की ऊर्जा होती है। ये रंग शक्ति देता है इसलिए घर में थोडा लाला रंग होना ही चाहिए।
  • नारंगी रंग महत्वाकांक्षाओ का और सेहत का प्रतिक है। युवाओ को अपने कमरे में ये रंग लगाना चाहिए इससे उनमें आगे बढ़ने का जोश बना रहेगा, पर अगर आपका स्वभाव गुस्सेल है तो आप ये रंग न लगाये। ऊपर दिए सभी टिप्स पर अमल करके देखिये आप अपने जीवन में खुद परिवर्तन महसूस करेंगे।

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क्या आपके घर में भी तो नहीं है ये वास्तु दोष के लक्ष्ण ?

वास्तु दोष क्या होता है?

वास्तु दोष अर्थात वो कारण जिसके वजह से आपके बनते काम बिगड़ जाते हैं और आपके घर में कभी भी सुखशांति और समृधि नही टिक पाती है। वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि इस दुनियाँ में दो तरह की ऊर्जा होती है एक होती है सकारात्मक और एक होती है नकारात्मक । सकारात्मक यानि वो ऊर्जा जिसकी वजह से घर में खुशहाली आती है और नकारात्मक ऊर्जा यानि वो ऊर्जा जिसकी वजह से घर से दुःख कभी जाते ही नही है। पर क्या आप जानते है कि ऐसे कुछ लक्षण होते है जिसको वास्तु दोष के लक्ष्ण कहते हैं जिन्हें समय पर पहचानकर आप अपने घर से नकारात्मकता दूर कर सकते है

वास्तु दोष के लक्ष्ण


वास्तु दोष निवारण उपाय


  • अगर आपको बच्चे नही हो रहे है तो ये वास्तु दोष हो सकता है इसका कारण आपके घर के बीच के हिस्से का सही न होना और उस जगह का उठा होना हो सकता है घर में कीकर का वृक्ष भी इसका कारण हो सकता है ।
  • अगर आपके घर की माली हालत सुधर नही रही है और इसके अलावा भी घर में कई परेशानियाँ बनी हुई है तो इसका कारण वास्तु दोष है।इसकी मुख्य वजह घर के दरवाजे का नैऋत्य कोण में होना होता है । घर का दरवाजा पश्चिम और दक्षिण दिशा में नही होना चाहिए वास्तु के अनुसार ये स्थान राहू ,केतु का होता है ।
  • अगर आपको लग रहा है भगवान् आपकी नही सुन रहे आपकी तबियत ठीक नही रहती और घर में हमेशा पैसो की किल्लत रहती है तो इसका अर्थ है आपके घर में वास्तु दोष है । इसका कारण ईशान कोण का सही न होना हो सकता है । ईशान कोण यानि वो दिशा जहाँ उत्तर और पूर्व दिशा मिलती है ।
  • अगर तमाम कोशिशो के बावजूद आप कर्ज से मुक्त नही हो पा रहे है तो ये वास्तु दोष हो सकता है । इसका कारण वायव्य कोण में दोष होना हो सकता है। पश्चिम और उत्तर दिशा के मिलने वाले स्थान को वायव्य कोण कहते है इस दोष की वजह से मित्रो पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी सम्बन्ध ख़राब रहते है ।
  • यदि घर बेचना चाहते है पर नही बेच पा रहे है और आपके घर में बीमारियों ने डेरा दाल दिया है तो इसकी वजह वास्तु दोष हो सकता है । इसका कारण है नैऋत्य कोण में दोष होना हो सकता है । दक्षिण और पश्चिम के मिलने वाले स्थान को नैऋत्य कोण कहते है । इस जगह पर अगर कोई गड्ढा है या उस जगह का भाग नीचा है तो ये वास्तु दोष है ।
  • अगर घर में हमेशा झगडे होते रहते है और घर की आर्थिक स्थिति ठीक नही रहती है तो इसका अर्थ है आपके घर में वास्तु दोष है वास्तु शास्त्र में ऐसा कहा गया है कि अगर दक्षिण और पश्चिम दिशा नीची और उत्तर और पूर्व की दिशा ऊँची हो तो घरवालो के बीच झगडा होता है और इसके चलते घर की माली हालत भी ख़राब होती जाती है ।
  • अगर आपके घर में बार बार दुर्घटनाएँ होती रहती है और आपके दुश्मनों की संख्या बढती जा रही है तो ये वास्तु दोष का एक लक्षण है । इसका कारण है आपके घर का उत्तर-पश्चिम हिस्सा ऊँचा होना ।
इस पोस्ट को पढ़कर आप वास्तु दोष के लक्ष्ण पहचान गयी होंगे, उम्मीद है आप इन दोषों के कारण आप दूर कर पाएंगे।

जानिये कैसी होनी चाहिए वास्तु के अनुसार सीढ़ी (vastu for staircase inside house)

Staircase Vastu - Staircase location as per vastu

घर का हर कोना हमे बहुत प्यारा होता है जिसे हम बड़े ही प्यार से सजाते है।  घर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है सीढियाँ। वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियां बनाई जाए तो वो तरक्की ला सकती है और अगर वास्तु के अनुसार सीढ़ी गलत बनी हो तो आपको नुकसान हो सकता है। सीढियों को बनाते वक्त भी वास्तु का अगर ध्यान रखा जाए तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है, इसलिए सीढियों से सम्बंधित कुछ जरुर वास्तु टिप्स इस पोस्ट में बताया गए है इसलिए पोस्ट को आखिर तक जरुर पढ़े।




  • वास्तु के अनुसार सीढियाँ घर के पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा में होना अच्छा माना जाता है
  • जब भी सीढियाँ बनवाएं उसका घुमाव दक्षिण दिशा की तरफ रखे

सीढ़ियों की संख्या -सीढ़ी डिजाइन

  • विषम संख्या में सीढ़ियां बनवाए यानि ३,५,७ ,९ आदि ।
  • कभी भी सीढियों के नीचे अटाला यानि बेकार की चीजे, जूते, चप्पल न रखे, ऐसा करना घर के मुखिया के लिए अशुभ होता है। सीढियाँ उत्तर से दक्षिण की तरफ या पूर्व से पश्चिम की और बनवाए।
  • अगर आपके घर में सीढियाँ उत्तर या पूर्व दिशा में है तो इसका वास्तु दोष ख़त्म करने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में कमरा बनवा ले ।

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  • अगर आप सीढियाँ पूर्व दिशा की ओर बनवा रही है तो इस बात का ख़ास ख्याल रखे कि सीढियाँ पूर्व दिशा वाली दीवार को न छुए। दोनों के बीच कम से कम ३ इंच की दूरी होनी चाहिए।
  • सीढियों पर रेलिंग जरुर लगवाएं। सीढ़ियों की शुरुवात त्रिकोणात्मक या गोलाई से नही होनी चाहिए।
  • अगर आपने बना बनाया घर ख़रीदा है और उस घर की सीढियों में वास्तु दोष है तो इसके निवारण के लिए उस जगह एक मिट्टी के कलश में बारिश का पानी भरकर, उस कलश को मिट्टी के ढक्कन से ढककर जमीन में गाढ़ दे। अगर आप ऐसा नही कर पा रहे हैं तो घर की छत पर पक्षियों के लिए मिट्टी के दो बर्तन रखे। एक में पानी और दूसरे में सतनाजा रखे।
  • जब भी आप घर में प्रवेश करे सबसे पहले सीढियाँ नही आनी चाहिए और न ही घर के बीचोबीच सीढियाँ होनी चाहिए।
  • सीढियों के नीचे कभी भी किचन न बनवाएं। ऐसा होने से आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है।
  • फिश एक्वेरियम कभी भी सीढ़ियों के नीचे न रखे या पानी से सम्बंधित कोई भी चीज न रखे।
  • वास्तु के अनुसार सीढ़ी चौड़ी होनी चाहिये।
  • वास्तु के अनुसार सीढ़ी में लाल रंग का इस्तेमाल न करे।
  • सीढियों के नीचे स्टोर रूम बनवा दे पर ध्यान रहे वो व्यवस्थित और साफ़ सुथरा हो।
  • सीढियों की और उसके नीचे रोज सफाई करे और वहां कभी भी कूड़ादान न रखे, ऐसा करने से वहां मक्खी और मच्छर नही पनपेंगे और आपके घर में नकारात्मकता नही आएगी।
  • पूजा का स्थान कुछ ख़ास और अलग होता है, इसलिए इसे कभी भी सीढियों के नीचे न बनाए। सीढियों के नीचे पूजाघर होने से आपको धनहानि हो सकती है।
  • इस बात का ख़ास ख्याल रखे कि सीढियों के नीचे कभी भी अँधेरा न हो, वहां छोटा सा बल्ब जरुर लगाके रखे।
  • यदि आपके घर की सीढियाँ टूट गयी है या उसमें दरार आ गयी है तो उसे तुरंत सही करवाए क्योकि ये कुछ अशुभ होने का संकेत होती है।
उम्मीद है आप सीढियों से सम्बंधित इन वास्तु टिप्स को फॉलो करेंगे और तरक्की की सीढियाँ चडेगे।

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वास्तु टिप्स : वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय


वास्तु शास्त्र एक मशहूर शास्त्र हैं जिसे दुनियाँ के अलग अलग हिस्से में अलग अलग नाम से माना जाता है। ये एक बहुत प्राचीन विद्या है। इस विद्या का इतना महत्व है कि आज सभी नए बनने वाले घर वास्तु शास्त्र के अनुसार बन रहे है।माना जाता है कि अगर कोई घर वास्तु के हिसाब से बना है तो वहां सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ होगी और वहां रहने वाले लोग हर तरह की मानसिक और शारीरिक पीड़ा से बचे रहेंगे। जो घर वास्तु के हिसाब से नही बनते वहां बीमारियाँ और दुःख दर्द अपना बसेरा बना लेता है।पूरा घर वास्तु के हिसाब से बनवाना चाहिए, इसमें शौचालय वास्तु भी आता है। शौचालय बनाते वक्त कुछ वास्तु टिप्स का अनुसरण करना चाहिए। जैसे की घर में शौचालय किस दिशा में होना चाहिए ,vastu for toilet seat direction .

वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय
vastu ke anusar toilet

चलिए जानते है कौन से वो वास्तु टिप्स:


  • वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में शौचालय किस दिशा में होना चाहिए
  • वास्तु के अनुसार शौचालय सीट की दिशा
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय tank

वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा



वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय

  • वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में शौचालय हमेशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही होना चाहिए।
  • शौचालय का गटर आपके घर के पश्चिम या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
  • दक्षिण दिशा के अलावा शौचालय की खिड़कियाँ और दरवाजा किसी भी दिशा में हो सकते हैं ।
  • बाथरूम ऐसा बनवाए की शौच करते समय आपका मुंह पूर्व दिशा में न हो।

वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा

  • वास्तु के अनुसार बाथरूम का नल पश्चिम या उतर पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • सीढियों के नीचे कभी भी बाथरूम न बनवाएं, ये वास्तु की नजर से सही स्थान नही है।
  • शौचालय का मतलब है वो जगह जहाँ हमारा शरीर हमारे अन्दर की गंदगी को बाहर निकालता है और वास्तु के अनुसार विसर्जन हमेशा दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम जोन में ही होना चाहिए।
  • बाथरूम का दरवाजा लकड़ी का बना होना चाहिए न कि लोहे का , लोहे के दरवाजे नैगेटिव एनर्जी पैदा करता है जो आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नही होगा ।

Vastu ke anusar toilet

  • हमेशा बाथरूम का दरवाजा बंद रखे ताकि नेगितिविटी आपके घर में न फैले। अगर आपका बाथरूम का दरवाजा हमेशा खुला रहता है तो इसका असर आपके व्यक्तिगत जीवन और आपके करियर पर पड़ता है।
  • आपके बाथरूम के बाहर कोई भी सजावट का सामान न रखे और न ही किसी देवता की मूर्ति या फोटो लगाये।

Vastu for attached bathroom and toilet

  • बाथरूम की दीवार पूजा के कमरे, किचन या बेडरूम से लगी हुई नही होनी चाहिये। वास्तु अनुसार अगर
  • बाथरूम की दीवार और आपके पलग की दीवारे एक है तो आपको डरवाने सपने आने लगेंगे।
  • इस बात का ख़ास ख्याल रखे कि आपके बाथरूम का वश बेसिन और नहाने की जगह बाथरूम के पूर्व, उत्तर या उतर पूर्व में हो।
  • बाथरूम में अगर एग्जॉस्ट फैन है तो वो पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में होना चाहिए ताकि वहां से आपके बाथरूम में फ्रेश हवा और सूरज की रोशनी आ सके।

Toilet position as per vastu

  • आपके बाथरूम में वेंटिलेशन होना चाहिए।
  • बाथरूम का इंटीरियर करवाते वक्त इस बात का ध्यान रखे कि बाथरूम की टाइल्स काली या गहरी नीले रंग की न हो। आपके बाथरूम की दीवार भूरे रंग,क्रीम रंग या मिटटी के रंग से मिलता जुलता कोई रंग होना चाहिए।
बाथरूम बनाते वक्त अगर आप ऊपर दिए सभी वास्तु टिप्स को अपनाएंगे तो आपके घर में खुशहाली, खुशियाँ होंगी और आप कई बीमारियों से बचे रहेंगे।

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क्या आप भी नहीं जानते वास्तु शास्त्र क्या है | what is vastu shastra

वास्तु एक प्राचीन विज्ञान हे जो बताता हे की काम करने और रहने वाली जगह का architecture किस प्रकार का होना चाहिए। वास्तु के नियम के अनुसार बनायीं गई ईमारत प्रकृति के सारे लाभ उठाने मे मदद करती है। वास्तु वो विज्ञान हे जिसकी वजह से सारी दिशाओं और मानव जाती के बीच संतुलन बना रहता है। 

वास्तु शास्त्र क्या है ?



वास्तु शास्त्र वो है जो विज्ञानं , कला , खगोल, और ज्योतिष को जोड़ता है। यह डिजाइनिंग का और ईमारत बनाने का एक विज्ञान है।वास्तु शास्त्र की मदद से हम हमारी जिंदगी एक बेहतर जिंदगी बना सकती है। हमे हमेशा वास्तु  शास्त्र के नियम के अनुसार ही बिल्डिंग बनानी चाहिए। वास्तु शास्त्र के नियमो का पालन करने से जीवन सुखमय रहता है।  

पंचतत्व का महत्व -वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व



वास्तु मे प्रकृति के 5 तत्त्व बहुत जरूरी होते हे। यह 5 तत्त्व है हवा , जल , धरती , आग और अंतरिक्ष। कोई भी सरंचना जो इन तत्वों के या 4 दिशाओं के अनुसार नई होती वो कभी ना कभी मुसीबतें झेलती है। जो इमारतें वास्तु शास्त्र के नियमो के अनुसार बनायीं जाती है वो ईमारत वहां रहने वाले लोगों के लिए कभी ना कभी सौभाग्यशाली साबित होती है। वास्तु शास्त्र के विचार के पीछे architecture design और प्रकृति और उसके आध्यात्मिक विश्वासों का एकीकरण करना है। वास्तु शास्त्र का सिद्धांत इमारतों की सरंचना मे प्राचीन वक़्त से इस्तेमाल किया जा रहा है और आज भी किया जाता है। मकान, मंदिर और भवन के निर्माण के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला प्राचीन विज्ञानं है। कभी कभी वास्तु शास्त्र को आधुनिक समय के विज्ञान का स्वरुप माना जाता है। 

वास्तु के तत्त्व

डिज़ाइन का कार्य  समझने के लिए जरूरी है इन 5 तत्वों को समझना: 
इनमे क्या क्या चीजे देखी जाती है 

  • धरती

प्रकृति का सबसे पहला तत्त्व जो सबसे जयदा ऊर्जा उत्त्पन करता है, धरती । भूमि खरीदने से पहले जरूरी है उसका परामर्श करना क्यूंकि वास्तु मे भूमि की मिटटी और  क्षेत्र जरूरी होता है । वास्तु मे यह तत्त्व सबसे जरूरी है । 

  • जल

धरती पे जल अनेक रूपों मे उपलभ्द है। जेसे की बारिश, समुद्र और नदियां। वास्तु मे यह दूसरा जरूरी तत्त्व है । वास्तु जल स्रोतों का सही प्लेसमेंट बताता है। जल ईशान कोण का तत्त्व है इसीलिए घर का जल ईशान कोण की ओर से ही बहार निकलना चाहिए । जल के लिए ईशान कोण दिशा उपयुक्त है । 

  • अग्नि

अग्नि दक्षिण पूर्व दिशा का तत्त्व है। वास्तु के अनुसार घर मे रसोई में आग और बिजली के उपकरणों हमेशा दक्षिण पूर्व दिशा मे रखना चाहिए। सारे ऊर्जा के स्रोतों का आधार अग्नि है। वास्तु के अनुसार घर मे सूरज की रौशनी के लिए हवादार सही होना चाहिए।

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  • वायु

वायु सबसे जरूरी है सारे जीवित लोगों के लिए धरती पर। वास्तु मे वायु एक और जरूरी तत्त्व है। वायु भी ईशान कोण दिशा का तत्त्व है। वायु अनेक गैसों का समूह है। जैसे की ऑक्सीजन , नाइट्रोजन , हीलियम और कार्बन डाइऑक्साइड। इन सभी गैसों का संतुलित प्रतिशत जरूरी है मानव जाती के लिए। vastu के अनुसार घर मे खिड़कियों और दरवाज़ों की दिशाएं बहुत जरूरी है।

  • ब्रह्माण्ड

वास्तु शास्त्रअनेक प्रकार की दिशाएं बताता है बेहतर स्पेस के लिए। वास्तु के अनुसार घर के केंद्र मे खुली जगह होनी चाहिए। 

वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व

वास्तु मे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम मूल दिशाएं है। 
  • वास्तुशास्त्र दिशा-पूर्व दिशा

 वास्तु शास्त्र मे यह दिशा बहुत जरूरी है। यह सूर्य उदय की दिशा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन बनाते वक़्त यह दिशा सबसे ज्यादा खुली रेहनी चाहिए। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से वहां रहने वाले लोग बीमार रहते है।परेशान और चिंतित रहना भी इस दिशा मे वास्तु दोष होने के लक्षण है।
  • वास्तुशास्त्र दिशा- आग्नेय दिशा

आग्नेय दिशा पूर्व और दक्षिण दिशा की मध्य दिशा होती है। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से घर मै अशांति और तनाव रहता है। जब यह दिशा शुभ होती है तब घर मे रहने वाले स्वस्थ रहते है। अग्नि तत्वे के सारे कार्यों के लिए यह दिशा शुभ होती है। 
  • वास्तु शास्त्र मे दिशा - दक्षिण दिशा

वास्तु शास्त्र मे यह दिशा सुख और समृद्धि का प्रतिक होती है। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से मान सामान और रोज़गार मे परेशानिया होती है। 
  • वास्तु शास्त्र मे दिशा - नैऋत्य दिशा

नैऋत्य दिशा दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य दिशा होती है। दुर्घटना , रोग और मानसिक अशांति इस दिशा मे वास्तु दोष क लक्षण है। इस दिशा मे वास्तु दोष आपके आचरण और व्यव्हार को भी प्रभावित करती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर बनाते वक़्त इस दिशा को बाहरी रखना चाहिए। 
  • वास्तु शास्त्र मे दिशा - इशान दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय इस दिशा मे नहीं होना चाहिए।