सोमवार, 31 दिसंबर 2018

वास्तु के अनुसार रसोई (kitchen vastu tips in hindi)


आप सभी जानते होंगे कि महिलाओ का ज्यादा से ज्यादा वक्त घर के एक हिस्से में सबसे ज्यादा बीतता है, और वो जगह है किचन यानि रसोईघर। इसलिए घर का ये काफी अहम् हिस्सा होता है। रसोई के लिए भी kitchen vastu  होता है, जिस पर ध्यान देना बेहद जरुरी होता है। रसोई घर के हर हिस्से के बारे में vastu जरुरी होता है, जैसे चूल्हा रखने का स्थान, खिड़की, दरवाजा आदि की दिशा जैसी कई बातो पर ध्यान देना जरुरी होता है।
वास्तु के अनुसार रसोई 

Kitchen Vastu Tips


चलिए जानते हैं उन ख़ास और जरुरी वास्तु बातो के बारे में-

  1. Vastu Shastra के अनुसार किचन हमेशा 'आग्नेय कोण' में होना चाहिए, 'आग्नेय कोण' अर्थात दक्षिण पूर्व दिशा। अगर इस दिशा में रसोईघर नही बन सकता है तो आप उत्तर पश्चिम दिशा में बनवा सकते है, ये वैकल्पिक स्थान होता है।
  2. कुछ ऐसी दिशाएं होती है जिस दिशा में रसोईघर बिलकुल नही होनी चाहिए जैसे उत्तर, दक्षिण पश्चिम और उत्तर पूर्व दिशा। अगर आपकी रसोईघर दक्षिण दिशा में बनी हुई है तो आप अपना चूल्हा पूर्व दिशा में रखे।
  3. Vastu के अनुसार खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्म कभी भी उत्तर या पश्चिम दिशा की दीवारों से जुड़ा हुआ नही होना चाहिए।
  4. किचन में पीने का पानी उत्तर दिशा की और रखे।
  5. बर्तन धोने वाला वाश बेसिन सिंक उत्तर पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
  6. किचन की दीवारों पर कभी भी काला ग्रेनाईट इस्तेमाल न करे, इसके लिए सफेद पत्थर या हरा ग्रेनाईट या महरून ग्रेनाईट इस्तेमाल में लाये।
  7. Vastu के अनुसार जब भी खाना बनाए अपना मुंह पूर्व दिशा की और रखे।
  8. अगर किचन में फ्रिज हैं तो इसे उत्तर पश्चिम दिशा में रखे।
  9. किचन की खिड़की के नीचे चूल्हा नही हो, इस बात का ख़ास ख्याल रखे।
  10. चूल्हा और बर्तन धोने का सिंक एक ही प्लेटफॉर्म में नही होना चाहिए।
  11. जिस जगह पर चूल्हा रखा है उसके ऊपर कभी भी शेल्फ न बनाएं।
  12. किचन की दीवारों पर कभी भी आसमानी रंग या नीला रंग का इस्तेमाल न करे।
  13. अपने अनाज को हमेशा रसोई की दक्षिण पश्चिम दिशा में रखे।
  14. कभी भी रसोई के बीचोबीच चूल्हा अर्थात गैस न रखे।
  15. किचन का दरवाजा उत्तर दिशा या उत्तर पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  16. यदि किचन की कम से कम एक खिड़की पूर्व दिशा में तो वास्तु के हिसाब से इसे काफी उत्तम माना जाता है।
  17. वास्तु के अनुसार रसोई में डाइनिंग टेबल नही रखना चाहिए पर अगर रखना जरुरी है तो इसे पश्चिम दिशा या उत्तर पश्चिम दिशा में ही रखे।
  18. चूल्हा और सिलेंडर किचन की दक्षिण पूर्व दिशा में रखे।
  19. अगर आपके पास माइक्रोवेव है तो इसे दक्षिण पूर्व दिशा में रखे।
  20. इस बात का ख़ास ध्यान रखे की आपके किचन का नल सही काम कर रहा हो, अगर नल लीक कर रहा हो तो उसकी तुरंत मरमत करवाएं।                                                                                                 

Vastu Compass 


Vastu compass हमेशा 8 charts के साथ आता है। यह होते है घर के लिए , living room के लिए , शयन कक्ष के लिए, रसोई के लिए, दुकान के लिए, काम करने की जगह के लिए , factory और dispensary के लिए। vastu shastra के मदद से हम vastu compass को तरीके से इस्तेमाल कर सकते है। 
kitchen vastu के हिसाब से ऐसे करे vastu compass का इस्तेमाल : 
  1. सबसे पहले तो रसोई के लिए दिया हुआ chart लीजिये क्यूंकि vastu compass का हर chart अलग aspect बताता है। 
  2. Chart को यन्त्र के बीच मे रखे ताकि बीच वाली pin chart के बीच मे से बाहर निकले। 
  3. Vastu compass मे जो दिशा बताने वाली सुई आती है उसको chart के उप्पर रखे। 
  4. दिशा बताने वाली सुई को घूमने दे बिना रुकावट। कुछ समय बाद सुई घूमना बंद करदेगी। 
  5. सही दिशा पहचाने के लिए सुई पे जो marks होते है उनको ध्यान से पढ़िए। 
  6. अपनी रसोई के दिशा फिर आपसे सुई की बताई हुई दिशा से verify करे और जहाँ जरूरत हो वह changes करे । 

अपने घर के इस अहम् हिस्से को बनवाने के समय ऊपर दिए सभी वास्तु टिप्स पर जरुर ध्यान दे ताकि आपके घर में खुशहाली आए और वास्तु दोष की वजह से किसी प्रकार की दिक्कत न आये।


वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दीवारो का रंग (wall colours according to vastu shastra )

Colour of wall according to vastu

अगर मैं कहू कि घर की दीवारों का रंग उस घर में रहने वाले लोगो पर असर डालता है तो क्या आप विश्वास करेंगे? शायद नही पर जब आप इस आर्टिकल को पूरा पढेंगे आपको पता चलेगा कि घर की दीवारो का रंग वास्तु के हिसाब से न हो तो उसका गलत असर पड़ता है। चलिए बिना समय गवाए शुरू करते है। 



Wall Color According To Vastu

मनोवैज्ञानिको का भी मनाना है कि रंगों का असर लोगो पर पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि हर रंग का एक इमोशन होता है जो कई बार उस घर में रहने वाले लोगो के इमोशन से मेल नही खाता है। इसलिए आपकी मदद के लिए घर पर लगने वाले रंगों से सम्बंधित वास्तु के कुछ टिप्स शेयर कर रहे है- 
दिशा के आधार पर ( vastu colors for north wall)
  1. उत्तर पूर्व दिशा में – हल्का नीला 
  2. पूर्व दिशा में – हल्का नीला या सफेद रंग 
  3. दक्षिण पूर्व दिशा – ऐसा माना है कि दक्षिण पूर्व दिशा अग्नि से सम्बंधित होती है इसलिए इस दिशा के लिए सिल्वर, गुलावी, ऑरेंज रंग सही होता है, क्योकि इन रंगों से घर में ऊर्जा बदती है। 
  4. उत्तर दिशा में – पिस्ता हरा और हरा रंग 
  5. उत्तर पश्चिम-दिशा में- ऐसा माना जाता है ये दिशा हवा से सम्बंधित होती है। इसी कारण ये दिशा के लिए हल्का स्लेटी, सफेद और क्रीम रंग उपयुक्त होता है।
  6. पश्चिम दिशा में – ऐसा माना जाता है कि ये जगह जल से सम्बंधित होती है इसलिए इस दिशा के लिए सफेद और नीला रंग सबसे सही होता है। 
  7. दक्षिण-पश्चिम दिशा में – इस दिशा के लिए मिट्टी के जैसे रंग या हल्का ब्राउन रंग उपयुक होता है। 
  8. दक्षिण दिशा के लिए पीला और लाल रंग उपयुक्त होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अपने घर पर कुछ ख़ास रंग जैसे काला, गुलाबी और लाला रंग लगाने से पहले ये पता कर लेना चाहिए कि क्या ये रंग आपके लिए उपयुक्त है, क्योकि ये रंग हर किसी के लिए सही नही होते। 

कमरों के हिसाब से भी रंग होना चाहिए (wall colours for bedroom according to vastu)

wall colours for bedroom according to vastu
wall colours for bedroom according to vastu
kitchen wall colors according to vastu
  1. घर के मास्टर बेडरूम के लिए दिशा होनी चाहिए दक्षिण पश्चिम और रंग होना चाहिए नीला। 
  2. घर के लिविंग रूम या गेस्ट रूम के लिए दिशा उत्तर-पश्चिम होनी चाहिये और रंग सफेद होना चाहिए। 
  3. बच्चो का कमरे के लिए दिशा होनी चाहिए उत्तर पश्चिम और रंग सफेद। 
  4. किचन के लिए दिशा होनी चाहिए दक्षिण-पूर्व और रंग लाल या ऑरेंज होना चाहिए। 
  5. शौचालय के लिए दिशा होनी चाहिये उत्तर-पश्चिम और रंग सफेद होना चाहिए। 
  6. घर के हॉल के लिए दिशा उत्तर पूर्व या उत्तर पश्चिम होनी चाहिए और रंग सफेद या पीला होना चाहिए।
  7. बाहर से घर का रंग उस घर के मालिक के हिसाब से होना चाहिये।

 चलिए जानते हैं कौन सा रंग किस तरह के इंसान से मेल खाता है 

  1. हल्का भूरा रंग पृथ्वी से सम्बंधित है यानि ये रंग शांति और पोषण का प्रतिक है। ऐसा माना जाता है कि हरा रंग सुख समृद्धि का प्रतिक होता है । ऐसा भी माना जाता है कि ये रंग दीवारों को जीवंत कर देते है।ये रंग आँखों को भी आराम देता है। 
  2. बैंगनी को शिष्टता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए घर पर बैंगनी या इससे मिलता जुलता रंग लगाना अच्छा माना जाता है। इस रंग से बने पेंटिंग से आपकी शान और शौकत का भाव प्रकट होता है। इसलिए जिन लोगो को शाही अंदाज में रहना पसंद है तो उनको ये रंग जरुर लगवाना चाहिए क्योकि ये रंग उनको काफी सूट करेगा। 
  3. नीला रंग ठंडा और सुकून देने वाला माना जाता है। कमरे में ये रंग होने से मूड हल्का रहा है और इंसान का मन प्रसन्न रहता है। आजकल के मॉडर्न घरो के लिए ये रंग उपयुक्त है। 
  4. लाल रंग प्यार का प्रतिक है। इस रंग में जुनून, अग्नि और गर्मी की ऊर्जा होती है। ये रंग शक्ति देता है इसलिए घर में थोडा लाला रंग होना ही चाहिए।
  5. नारंगी रंग महत्वाकांक्षाओ का और सेहत का प्रतिक है। युवाओ को अपने कमरे में ये रंग लगाना चाहिए इससे उनमें आगे बढ़ने का जोश बना रहेगा, पर अगर आपका स्वभाव गुस्सेल है तो आप ये रंग न लगाये। ऊपर दिए सभी टिप्स पर अमल करके देखिये आप अपने जीवन में खुद परिवर्तन महसूस करेंगे।

क्या आपके घर में भी तो नहीं है ये वास्तु दोष के लक्ष्ण ?


वास्तु दोष क्या होता है?


वास्तु दोष अर्थात वो कारण जिसके वजह से आपके बनते काम बिगड़ जाते हैं और आपके घर में कभी भी सुखशांति और समृधि नही टिक पाती हैवास्तु शास्त्र में कहा गया है कि इस दुनियाँ में दो तरह की ऊर्जा होती है एक होती है सकारात्मक और एक होती है नकारात्मकसकारात्मक यानि वो ऊर्जा जिसकी वजह से घर में खुशहाली आती है और नकारात्मक ऊर्जा यानि वो ऊर्जा जिसकी वजह से घर से दुःख कभी जाते ही नही हैपर क्या आप जानते है कि ऐसे कुछ लक्षण होते है जिसको वास्तु दोष के लक्ष्ण कहते हैं जिन्हें समय पर पहचानकर आप अपने घर से नकारात्मकता दूर कर सकते है|

वास्तु दोष के लक्ष्ण


·         अगर आपको बच्चे नही हो रहे है तो ये वास्तु दोष हो सकता हैइसका कारण आपके घर के बीच के हिस्से का सही न होना और उस जगह का उठा होना हो सकता हैघर में कीकर का वृक्ष भी इसका कारण हो सकता है|
·         अगर आपके घर की माली हालत सुधर नही रही है और इसके अलावा भी घर में कई परेशानियाँ बनी हुई है तो इसका कारण वास्तु दोष हैइसकी मुख्य वजह घर के दरवाजे का नैऋत्य कोण में होना होता हैघर का दरवाजा पश्चिम और दक्षिण दिशा में नही होना चाहिएवास्तु के अनुसार ये स्थान राहूकेतु का होता है|
·         अगर आपको लग रहा है भगवान् आपकी नही सुन रहेआपकी तबियत ठीक नही रहती और घर में हमेशा पैसो की किल्लत रहती है तो इसका अर्थ है आपके घर में वास्तु दोष हैइसका कारण ईशान कोण का सही न होना हो सकता हैईशान कोण यानि वो दिशा जहाँ उत्तर और पूर्व दिशा मिलती है|
·         अगर तमाम कोशिशो के बावजूद आप कर्ज से मुक्त नही हो पा रहे है तो ये वास्तु दोष हो सकता हैइसका कारण वायव्य कोण में दोष होना हो सकता है। पश्चिम और उत्तर दिशा के मिलने वाले स्थान को वायव्य कोण कहते हैइस दोष की वजह से मित्रोपड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी सम्बन्ध ख़राब रहते है|

·         यदि घर बेचना चाहते है पर नही बेच पा रहे है और आपके घर में बीमारियों ने डेरा दाल दिया है तो इसकी वजह वास्तु दोष हो सकता हैइसका कारण है नैऋत्य कोण में दोष होना हो सकता हैदक्षिण और पश्चिम के मिलने वाले स्थान को नैऋत्य कोण कहते हैइस जगह पर अगर कोई गड्ढा है या उस जगह का भाग नीचा है तो ये वास्तु दोष है|

·         अगर घर में हमेशा झगडे होते रहते है और घर की आर्थिक स्थिति ठीक नही रहती है तो इसका अर्थ है आपके घर में वास्तु दोष है| वास्तु शास्त्र में ऐसा कहा गया है कि अगर दक्षिण और पश्चिम दिशा नीची और उत्तर और पूर्व की दिशा ऊँची हो तो घरवालो के बीच झगडा होता है और इसके चलते घर की माली हालत भी ख़राब होती जाती है|

·         अगर आपके घर में बार बार दुर्घटनाएँ होती रहती है और आपके दुश्मनों की संख्या बढती जा रही है तो ये वास्तु दोष का एक लक्षण हैइसका कारण है आपके घर का उत्तर-पश्चिम हिस्सा ऊँचा होना|
इस पोस्ट को पढ़कर आप वास्तु दोष के लक्ष्ण पहचान गयी होंगे, उम्मीद है आप इन दोषों के कारण आप दूर कर पाएंगे|

जानिये कैसी होनी चाहिए वास्तु के अनुसार सीढ़ी


 घर का हर कोना हमे बहुत प्यारा होता है जिसे हम बड़े ही प्यार से सजाते है|  घर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है सीढियाँवास्तु शास्त्र के अनुसार घर पर बनी सीढियाँ अगर वास्तु के हिसाब से बनाई जाए तो वो तरक्की ला सकती है और अगर वास्तु के हिसाब से गलत बनी हो तो आपको नुकसान हो सकता है| सीढियों को बनाते वक्त भी वास्तु का अगर ध्यान रखा जाए तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है, इसलिए सीढियों से सम्बंधित कुछ जरुर वास्तु टिप्स इस पोस्ट में बताया गए है इसलिए पोस्ट को आखिर तक जरुर पढ़े|


  1. वास्तु के अनुसार सीढियाँ घर के पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा में होना अच्छा माना जाता है|
  2. जब भी सीढियाँ बनवाएं उसका घुमाव दक्षिण दिशा की तरफ रखे|
  3.  विषम संख्या में सीढ़ियां बनवाए यानि ३९ आदि|
  4.  कभी भी सीढियों के नीचे अटाला यानि बेकार की चीजे, जूते, चप्पल न रखे, ऐसा करना घर के मुखिया के लिए अशुभ होता है| सीढियाँ उत्तर से दक्षिण की तरफ या पूर्व से पश्चिम की और बनवाए|
  5. अगर आपके घर में सीढियाँ उत्तर या पूर्व दिशा में है तो इसका वास्तु दोष ख़त्म करने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में कमरा बनवा ले|
  6. अगर आप सीढियाँ पूर्व दिशा की ओर बनवा रही है तो इस बात का ख़ास ख्याल रखे कि सीढियाँ पूर्व दिशा वाली दीवार को न छुए| दोनों के बीच कम से कम ३ इंच की दूरी होनी चाहिए|
  7.  सीढियों पर रेलिंग जरुर लगवाएं|
  8.  सीढ़ियों की शुरुवात त्रिकोणात्मक या गोलाई से नही होनी चाहिए।
  9. अगर आपने बना बनाया घर ख़रीदा है और उस घर की सीढियों में वास्तु दोष है तो इसके निवारण के लिए उस जगह एक मिट्टी के कलश में बारिश का पानी भरकर, उस कलश को मिट्टी के ढक्कन से ढककर जमीन में गाढ़ दे| अगर आप ऐसा नही कर पा रहे हैं तो घर की छत पर पक्षियों के लिए मिट्टी के दो बर्तन रखे| एक में पानी और दूसरे में सतनाजा रखे|
  10.  जब भी आप घर में प्रवेश करे सबसे पहले सीढियाँ नही आनी चाहिए और न ही घर के बीचोबीच सीढियाँ होनी चाहिए|
  11.  सीढियों के नीचे कभी भी किचन न बनवाएं| ऐसा होने से आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है|
  12.  फिश एक्वेरियम कभी भी सीढ़ियों के नीचे न रखे या पानी से सम्बंधित कोई भी चीज न रखे|
  13. सीढियाँ चौड़ी होनी चाहिये|
  14.  सीढ़ीयो में लाल रंग का इस्तेमाल न करे|
  15.  सीढियों के नीचे स्टोर रूम बनवा दे पर ध्यान रहे वो व्यवस्थित और साफ़ सुथरा हो|
  16.  सीढियों की और उसके नीचे रोज सफाई करे और वहां कभी भी कूड़ादान न रखे, ऐसा करने से वहां मक्खी और मच्छर नही पनपेंगे और आपके घर में नकारात्मकता नही आएगी|
  17.  पूजा का स्थान कुछ ख़ास और अलग होता है, इसलिए इसे कभी भी सीढियों के नीचे न बनाए| सीढियों के नीचे पूजाघर होने से आपको धनहानि हो सकती है|
  18.  इस बात का ख़ास ख्याल रखे कि सीढियों के नीचे कभी भी अँधेरा न हो, वहां छोटा सा बल्ब जरुर लगाके रखे|
  19.  यदि आपके घर की सीढियाँ टूट गयी है या उसमें दरार आ गयी है तो उसे तुरंत सही करवाए क्योकि ये कुछ अशुभ होने का संकेत होती है|
उम्मीद है आप सीढियों से सम्बंधित इन वास्तु टिप्स को फॉलो करेंगे और तरक्की की सीढियाँ चडेगे|

वास्तु टिप्स : वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय


वास्तु शास्त्र एक मशहूर शास्त्र हैं जिसे दुनियाँ के अलग अलग हिस्से में अलग अलग नाम से माना जाता है। ये एक बहुत प्राचीन विद्या है। इस विद्या का इतना महत्व है कि आज सभी नए बनने वाले घर वास्तु शास्त्र के अनुसार बन रहे है।माना जाता है कि अगर कोई घर वास्तु के हिसाब से बना है तो वहां सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ होगी और वहां रहने वाले लोग हर तरह की मानसिक और शारीरिक पीड़ा से बचे रहेंगे। जो घर वास्तु के हिसाब से नही बनते वहां बीमारियाँ और दुःख दर्द अपना बसेरा बना लेता है।पूरा घर वास्तु के हिसाब से बनवाना चाहिए, इसमें शौचालय भी आता है। शौचालय बनाते वक्त कुछ वास्तु टिप्स का अनुसरण करना चाहिए। 


वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय
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चलिए जानते है कौन से वो वास्तु टिप्स:

  1. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में शौचालय कहाँ होने चाहिए
  2. वास्तु के अनुसार शौचालय सीट की दिशा
  3. वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय tank

वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय
  1. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में शौचालय हमेशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही होना चाहिए।
  2. शौचालय का गटर आपके घर के पश्चिम या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
  3. दक्षिण दिशा के अलावा शौचालय की खिड़कियाँ और दरवाजा किसी भी दिशा में हो सकते हैं ।
  4. बाथरूम ऐसा बनवाए की शौच करते समय आपका मुंह पूर्व दिशा में न हो।
  5. वास्तु के अनुसार बाथरूम का नल पश्चिम या उतर पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  6. सीढियों के नीचे कभी भी बाथरूम न बनवाएं, ये वास्तु की नजर से सही स्थान नही है।
  7. शौचालय का मतलब है वो जगह जहाँ हमारा शरीर हमारे अन्दर की गंदगी को बाहर निकालता है और वास्तु के अनुसार विसर्जन हमेशा दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम जोन में ही होना चाहिए।
  8. बाथरूम का दरवाजा लकड़ी का बना होना चाहिए न कि लोहे का लोहे के दरवाजे नैगेटिव एनर्जी पैदा करता है जो आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नही होगा
  9. हमेशा बाथरूम का दरवाजा बंद रखे ताकि नेगितिविटी आपके घर में न फैले। अगर आपका बाथरूम का दरवाजा हमेशा खुला रहता है तो इसका असर आपके व्यक्तिगत जीवन और आपके करियर पर पड़ता है।
  10. आपके बाथरूम के बाहर कोई भी सजावट का सामान न रखे और न ही  किसी देवता की मूर्ति या फोटो लगाये।
  11. बाथरूम की दीवार पूजा के कमरे, किचन या बेडरूम से लगी हुई नही होनी चाहिये। वास्तु अनुसार अगर बाथरूम की दीवार और आपके पलग की दीवारे एक है तो आपको डरवाने सपने आने लगेंगे।
  12. इस बात का ख़ास ख्याल रखे कि आपके बाथरूम का वश बेसिन और नहाने की जगह बाथरूम के पूर्व, उत्तर या उतर पूर्व में हो।
  13. बाथरूम में अगर एग्जॉस्ट फैन है तो वो पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में होना चाहिए ताकि वहां से आपके बाथरूम में फ्रेश हवा और सूरज की रोशनी आ सके।
  14. आपके बाथरूम में वेंटिलेशन होना चाहिए।
  15. बाथरूम का इंटीरियर करवाते वक्त इस बात का ध्यान रखे कि बाथरूम की टाइल्स काली या गहरी नीले रंग की न हो। आपके  बाथरूम की दीवार भूरे रंग,क्रीम रंग या मिटटी के रंग से मिलता जुलता कोई रंग होना चाहिए।


बाथरूम बनाते वक्त अगर आप ऊपर दिए सभी वास्तु टिप्स को अपनाएंगे तो आपके घर में खुशहाली, खुशियाँ होंगी और आप कई  बीमारियों से बचे रहेंगे।

वास्तु क्या है ?

vastu एक प्राचीन विज्ञान हे जो बताता हे की काम करने और रहने वाली जगह का architecture किस प्रकार का होना चाहिए। वास्तु के नियम के अनुसार बनायीं गई ईमारत मदद करती है प्रकृति के सारे लाभ उठाने मे। vastu वो विज्ञान हे जिसकी वजह से सारी दिशाओं और मानव जाती के बीच संतुलन बना रहता है।

 

वास्तु शास्त्र क्या है ? 


वास्तु शास्त्र वो है जो विज्ञानं , कला , खगोल, और ज्योतिष को जोड़ता है। यह एक विज्ञान है डिजाइनिंग का और ईमारत बनाने का।वास्तु शास्त्र की मदद से हम हमारी जिंदगी एक बेहतर जिंदगी बना सकती है। हमे हमेशा वास्तु  शास्त्र के नियम के अनुसार ही बिल्डिंग बनानी चाहिए। वास्तु शास्त्र के नियमो का पालन करने से जीवन सुखमय रहता है।  वास्तु मे प्रकृति के ५ तत्त्व बहुत जरूरी होते हे। यह ५ तत्त्व है हवा , जल , धरती , आग और अंतरिक्ष। कोई भी सरंचना जो इन तत्वों के या ४ दिष्याओं के अनुसार नई होती वो कभी ना कभी मुसीबतें झेलती है।जो इमारतें वास्तु  शास्त्र के नियमो के अनुसार बनायीं  गयी है वो  ईमारत वहां  रहने वाले लोगों के लिए कभी ना कभी सौभाग्यशाली साबित होती है। वास्तु शास्त्र क विचार के पीछे architecture design और प्रकृति और उसके आध्यात्मिक विश्वासों का एकीकरण करना है। वास्तु शास्त्र का सिद्धांत इमारतों की सरंचना मे प्राचीन वक़्त से इस्तेमाल किया जा रहा है और आज भी किया जाता है। vastu shastra for home, मंदिर और भवन के निर्माण के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला प्राचीन विज्ञानं है। कभी कभी वास्तु शास्त्र को आधुनिक समय के विज्ञान architecture का स्वरुप माना जाता है। 

वास्तु के तत्त्व 

vastu एक विज्ञान है जो प्रकृति और ब्रह्माण्ड के ५ तत्त्वों को जोड़ता है ताकि उनका और आदमी के बीच संतुलन बने रहे। डिज़ाइन का कार्य इन ५ तत्वों के साथ बिलकुल समझने के लिए जरूरी है इन ५ तत्वों को एक एक करके समझना: 

१. धरती  

 



यह सबसे पहला तत्त्व है प्रकृति का जो सबसे जयदा ऊर्जा उत्त्पन करता है। भूमि खरीदने से पहले जरूरी है उसका परामर्श करना क्यूंकि भूमि की मिटटी , क्षेत्र जरूरी होता है वास्तु मे। यह तत्त्व सबसे जरूरी है वास्तु मे। 

२. जल 



धरती पे जल अनेक रूपों मे उपलभ्द है। जेसे की बारिश, समुद्र और नदियां। यह दूसरा जरूरी तत्त्व है वास्तु मे। वास्तु जल स्रोतों का सही प्लेसमेंट बताता है। जल ईशान कोण का तत्त्व है इसीलिए घर का जल ईशान कोण की ओर से ही बहार निकलना। ईशान कोण दिशा उपयुक्त है जल के लिए। 

 ३. अग्नि 


 
अग्नि दक्षिण पूर्व दिशा का तत्त्व है। वास्तु के अनुसार घर मे रसोई में आग और बिजली के उपकरणों हमेशा दक्षिण पूर्व दिशा मे रखना चाहिए। सारे ऊर्जा के स्रोतों का आधार अग्नि है। वास्तु के अनुसार घर मे सूरज की रौशनी के लिए हवादार सही होना चाहिए। 

४. वायु 

 


वायु सबसे जरूरी है सारे जीवित लोगों के लिए धरती पर। वास्तु मे वायु एक और जरूरी तत्त्व है। वायु भी ईशान कोण दिशा का तत्त्व है। वायु अनेक गैसों का समूह है। जैसे की ऑक्सीजन , नाइट्रोजन , हीलियम और कार्बन डाइऑक्साइड। इन सभी गैसों का संतुलित प्रतिशत जरूरी है मानव जाती के लिए। vastu के अनुसार घर मे खिड़कियों और दरवाज़ों की दिशाएं बहुत जरूरी है।

 ५. ब्रह्माण्ड 

 


vastu अनेक प्रकार की दिशाएं बताता है बेहतर स्पेस के लिए। वास्तु के अनुसार घर के केंद्र मे खुली जगह होनी चाहिए। 

वास्तु शास्त्र एवं दिशाएं 




वास्तु मे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम मूल दिशाएं है। 
 १. वास्तु शास्त्र मे दिशा - पूर्व दिशा 
 वास्तु शास्त्र मे यह दिशा बहुत जरूरी है। यह सूर्य उदय की दिशा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन बनाते वक़्त यह दिशा सबसे ज्यादा खुली रेहनी चाहिए। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से वहां रहने वाले लोग बीमार रहते है।परेशान और चिंतित रहना भी इस दिशा मे वास्तु दोष होने के लक्षण है। 
 २. वास्तु शास्त्र मे दिशा - आग्नेय दिशा 
आग्नेय दिशा पूर्व और दक्षिण दिशा की मध्य दिशा होती है। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से घर मै अशांति और तनाव रहता है। जब यह दिशा शुभ होती है तब घर मे रहने वाले स्वस्थ रहते है। अग्नि तत्वे के सारे कार्यों के लिए यह दिशा शुभ होती है। 
३. वास्तु शास्त्र मे दिशा - दक्षिण दिशा 
वास्तु शास्त्र मे यह दिशा सुख और समृद्धि का प्रतिक होती है। इस दिशा मे वास्तु दोष होने से मान सामान और रोज़गार मे परेशानिया होती है। 
४. वास्तु शास्त्र मे दिशा - नैऋत्य दिशा 
नैऋत्य दिशा दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य दिशा होती है। दुर्घटना , रोग और मानसिक अशांति इस दिशा मे वास्तु दोष क लक्षण है। इस दिशा मे वास्तु दोष आपके आचरण और व्यव्हार को भी प्रभावित करती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर बनाते वक़्त इस दिशा को बाहरी रखना चाहिए। 
५. वास्तु शास्त्र मे दिशा -इशान दिशा 
वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय इस दिशा मे नहीं होना चाहिए। 

वास्तु दोष क्या है ?

 



वास्तु एक पूल है मानव और प्रकृति के बीच। हम जितने आधुनिक हो रहे है उतना ही दूर हो रहे हमारे वेदों से। वास्तु एक विज्ञानं है सभी चीज़ो को सही जगह पर रखना और प्रकृति के तत्वों क साथ संतुलन बनाये रखने का। अगर कोई घर या काम करने की जगह कोई भी वास्तु का सिद्धांत का उल्लंघन करता है तो फिर उससे vastu dosh कहा जाता है। वास्तु दोष के कारन उस भवन में रह रहे व्यक्तियों को पारिवारिक , सार्थिक और सामाजिक मुसीबतों का सामना करना पढ़ता है। हर वास्तु दोष के उपाय होते है ताकि वो vastu dosh हटाया जा सके। वास्तु दोष के निवारण के कई तरीके है , जैसे की कमरे के सामान की जगह बदलना, घर का आतंरिक डिज़ाइन बदलना। अगर vastu dosh निवारण बताये गए माने जाते है तोह घर की सुख शान्ति और ख़ुशी लौट आती है। 

 वास्तु के क्या कारण है ? 

vastu dosh के कारन बहुत सारे है। कुछ वास्तु दोष के कारन हो सकते है जैसे की घर मे रह रहे लोगो की वजह से भी वास्तु खराब होता है। अगर घर मे रहने वाले लोग अनैतिक आचरण करते हो तोह उस वजह से भी घर का वास्तु ख़राब होता है। कई बार ऐसा भी होता है की घर का वास्तु सही है पर फिर भी घर मे सब सही नहीं लगता। इसका एक ही कारन है जो की है नकारात्मक ऊर्जा जो घर मे होती है।

 कैसे पहचाने की घर मे वास्तु दोष है ?


 

vastu dosh की लक्षण बहुत सारे है :
 १. यदि आप सर्दी झुकाम से ज्यादा पीड़ित रहते है तो इसका मतलब है की मकान मे ब्रह्मस्थल पे दोष है। 
२. यदि घर के अग्नि कोण और ईशान कोण में वास्तु दोष है तो फिर घर के लोगो लो दिएबेटीएस होने की संभावनाए ज्यादा है। 
३. vastu tips for house के according अगर घर के लोग हीन भावना रखते है तो इसका मतलब है की माकन के उत्तर पश्चिम या दक्षिण पश्चिम प्रकार मे वास्तु दोष है। 
४. vastu tips for home के according यदि आपका माकन गल्ली का आखरी माकन है तो घर के सदस्य ज्यादातर कष्ट मे रहते है। 
५. अगर घर पर किसी भी वृक्ष या मंदिर की छाया पढ़ रही है तोह घर के सदस्य ज्यादातर किसी न किसी रोग क शिखर रहते है। 
६. अगर नैऋृत्य कोण मे कोई कुवां है तो फिर उस घर के सदस्यों की आयु क्षय होती है। 

वास्तु दोष के सरल उपाय (vastu tips)


 
कुछ वास्तु दोष निवारण हेतु उपाय यहाँ दिए गए हुए है। यह सभी उपाय वास्तु दोष से कैसे बचें के सवाल का जवाब देते है। 
१. वास्तु के अनुसार सीढियाँ की उचाई तरीके की उचाईयों तक पहुँचने मे मदद कर सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में बनाई गई सीढ़ियां बहुत महत्वपूर्ण होती है। वास्तु के अनुसार सीढियाँ घर के उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए अथवा पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। 
२. वास्तुशास्त्र के नियम के अनुसार घर मे पूजा घर ईशान कोण मे होना चाहिए। 
३.पूजा घर मे ईशान कोण मे जल का कलश होना चाहिए। 
४. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कभी भी झाड़ू खड़ी नहीं रखनी चाहिए। 
५. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर मे अपने आप खुलने वाले दरवाज़े नहीं होने चाहिए। 
६. घर की खिड़कियां खुली रेहनी चाहिए ताकि रौशनी हमेशा अंदर आती रहे। 
 ७. वास्तु दोष से बचने का उपाय यह भी हो सकता है की जरूरी कागजात हमेशा अलमारी मे रखने चाहिए। 
८. vastu tips for kitchen के according kitchen मे भोजन बनाते समय पहली रोटी या तो गाय को या अग्निदेव को अर्पित करें।